म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज भैरु दादा रंगीला

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॥ पावन पाठ ॥

म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज, भैरु दादा रंगीला,

आज दर्शन रा कोड म्हारा पुरजो राज, भैरु दादा रंगीला ।

थारा भक्ति रा भूखा आया राज, भैरु दादा रंगीला,

म्हारी डोर, धनी थे संभालजो राज, भैरु दादा रंगीला ॥

थाने जैन - अजैन माने राज, भैरु दादा रंगीला,

नर - नारीया मंगल गावे राज, भैरु दादा रंगीला ।

थारा भक्तों ने पर्चो दिजो राज, भैरु दादा रंगीला,

दीन - दुःखिया री झोली भारजो राज, भैरु दादा रंगीला ॥

म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज, भैरु दादा रंगीला..

थारो डूंगरु पर डमरू बाजे राज, भैरु दादा रंगीला,

खड़ग - खप्पर धारी आवजो राज, भैरु दादा रंगीला ।

थारो त्रिशूल की धरती धूजै राज, भैरु दादा रंगीला,

थारो पर्चो जगत में छावे राज, भैरु दादा रंगीला ॥

म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज, भैरु दादा रंगीला..

आवो पधारो म्हारे आंगने राज, भैरु दादा रंगीला,

आवो घुंघरिया घमकाओ राज, भैरु दादा रंगीला ।

नाकोड़ा परिवार री मनुवार मानो राज, भैरु दादा रंगीला,

थारा भक्त मिठाई जिमावे राज, भैरु दादा रंगीला ॥

म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज, भैरु दादा रंगीला..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।