प्रभु हर दिल में वास करता है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु हर दिल में वास करता है

जरे जरे में वो समाया है

उसकी महिमा को जानते ही नही

जिस ने ये संसार रचाया है,

प्रभु हर दिल में वास करता है

मिले नव में ये सितारे देखो बड़े रंगीन नजारे देखो

चाँद सूरज के इशारे देखो

बेहती वायु के फुहारे देखो

कही बादल की गरज कही बिजली की लरज,

ये करिश्मा भी क्या दिखाया है,

प्रभु हर दिल में वास करता है

लाखो रंगों से ये रंग दी सुमन जिनकी खुसबू से महकता है चमन

पते पते की अलग है अक्त्रंग वारे जगदीश तुझे है धन धन,

फूल पती वे लता दे रही तेरा पता सब के आंचल में तू समाया है

प्रभु हर दिल में वास करता है

उचे सहलो की निराली सी छठा जिन पे छाई है

सुनहरी ये घटा कही उचे है बर्फ के टीले सुरख अग्नि की चलती लटा,

कही नदियों का मिलन कही सागर में नमन

तुझको करने को सिर जुकया है,

प्रभु हर दिल में वास करता है

सारी श्रृष्टि को रचाने वाला नित नए रंग दिखाने वाला,

पापी दुष्टों को रुलाने वाला

सब को दुखो से बचाने वाला,

कोई क्या जान सके नही पहचान सके

बड़ी बो मोल उसकी माया है,

प्रभु हर दिल में वास करता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।