हारे के सहारे आजा तेरा दास पुकारे आजा

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॥ पावन पाठ ॥

हारे के सहारे आजा, तेरा दास पुकारे आजा,

हम तो खड़े तेरे द्वार, सुन ले करुण पुकार,

हारे के सहारे आजा, आओ ना आओ ना..

कोई सुनता नहीं, मैं सुनाऊं किसे, ये बता,

दर्द दिल का भला मैं दिखाऊं किसे, ये बता ।

तेरे होते मेरी हार, कैसे होगी सरकार,

भैरुनाथ, एक बार तु धीर बंधाजा ॥

हम तो खड़े तेरे द्वार, सुन ले करुण पुकार,

हारे के सहारे आजा...

लाख चाहूँ मगर, बात बनती नहीं, क्या करूं,

नाव भटके मेरी, पार लगती नहीं, क्या करूं ।

कैसे नैय्या होगी पार, टूट गई पतवार,

भैरुनाथ, अब हाथ तू आके लगाजा ॥

हम तो खड़े तेरे द्वार, सुन ले करुण पुकार,

हारे के सहारे आजा...

हैं भरोसा तेरा, अब सहारा तेरा भैरूजी,

तेरे चरणों में है, अब गुजारा मेरा भैरूजी ।

सबकी यही हैं पुकार, आके भक्तों को संभाल,

भैरुनाथ, आके मूल छवि दिखलाजा ॥

हम तो खड़े तेरे द्वार, सुन ले करुण पुकार,

हारे के सहारे आजा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।