हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कर भोले कमाल सावन की रुत जा रही है,

हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

हमको बड़ा रुला रही है,

हरिद्वार से भोले तेरी कावड लेकर आता था

नील कंठ मैं नंगे नंगे पाँव चड जाता था,

कब होगा सब पेहले जैसा मन में आ रही है,

हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

हर साल ही आता मैं भोले तेरे दर्शन को

इस वार ना आ पाऊ बाबा तेरे दर्शन को

इसी बात की चिंता मुझको पल पल खा रही है

हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

भोले नाथ किरपा करो दर्द साहा नही जाएगा

टोनी तेरे दर्शन बिन सावन में न रेह पायेगा,

बम बम की वो जय कार कानो में आ रही है,

हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।