मैनूं याद बिहारी जी दी आवे बांका नित मेरे सुपने च आवे

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैनूं याद बिहारी जी दी आवे बांका नित मेरे सुपने च आवे

नीं मैं वृंदावन कुम दी फिरां राती जदों मेरी आख लग जावे,

ओदे प्रेम जाल विच एैसी फस गई काम कार मेनू पुल्ले संसार दे,

रोक टोक मेनू चंगी नइयों लगदी कर बार वाले ताने मैनूं मार दे,

आंदे जांदेया नू पुछदी फिरां कदों बांके बिहारी बुलावे ,

नीं मैं वृंदावन कुम दी......

सेवा कुञ्ज निधि वन यमुना दे मैनूं औंदे ने याद नजारे,

कन्ना विच मुरली दी तुन गूंजदी ओदे रूप तो जावां बलिहारे,

ओदे सांकरे बजार कुञ्ज गलियां लस्सी पेढ़ेयां दी याद बड़ी आवे,

नी मैं वृंदावन कुम दी......

ओदे मिलणे नूं जी बड़ा करदा दिन राती ओदी याद सतावे

होवे नज़र सबल्ली जे 'मधुप' ते मेरा सुपना साकार हो जावे,

मुक जान पव्वाढ़े सारे जग दे ब्रज वास जे मैनूं मिल जावे,

नी मैं वृंदावन कुम दी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।