बड़ी दुर से चलकर आया हूं मेरे दादा तेरे दर्शन के लिए

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॥ पावन पाठ ॥

बड़ी दुर से चलकर आया हूं,

मेरे दादा तेरे दर्शन के लिए ।

एक फुल गुलाब का लाया हूं,

चरणों में तेरे रखने के लिए ॥

ना रौली मोली चावल हैं,

ना धन दौलत की थैली हैं ।

दो आंसू बचाकर लाया हूं,

बस पूजा तेरी करने के लिए ॥

ना रंगमहल की अभिलाषा,

ना इच्छा सोने चांदी की ।

तेरी दया की दौलत काफी है,

बस झोली मेरी भरने के लिए ॥

मेरे दादा इच्छा नहीं मेरी,

अब यहां से वापस जाने की ।

चरणों में जगह दे दो थोड़ी,

मुझे जीवनभर रहने के लिए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।