भोले सावन के माह

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी भगती का चढ़ रिया से रंग भोले सावन के माह

कावड़िया घोटे भंग भोले सावन के माह

कवाडिया की होड़ लाग रही,

टोली बना के दोड लाग रही

कौन जीते गा जंग

आज जीते गा कौन जंग भोले सावन के माह

भगवा रंग दिखे से न्यारा बम बम काला ला जैकारा

ये हो रे मस्त मलंग

भोले सावन के माह

घोट घोट लारे से रगडा,

न्यारा शाही करे रे भंगड़ा

घने गजब का ढंग भोले सावन के माह

करिश्मा तने रोज न आवे सब भोले तेरे दर्शन चावे,

आजा भगता के तू संग भोले सावन के माह,

भोले सावन के माह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।