धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

थारे चरना में टेकू माथा माहरी दुर्गा माता

धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

या चरना की महिमा न्यारी मान जाए दुनिया सारी,

थारे दर पे लगा है ताता माहरी दुर्गा माता

धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

ज्योत जगे दिन रात थारी मैं जाऊ वारी बलिहारी,

कोई दर से ना खाली जाता माहरी दुर्गा माता

धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

उचे पर्वत मंदिर थारा बजरंगी है पेहरे धारा,

हर रात हॉवे जगराता माहरी दुर्गा माता

धोक धरु मैं दिन रात म्हारी दुरगा माता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।