एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

खान पान नु माया दिति रेहन नु सोहना घर दिता

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

ओह दिन मेनू भुल्दे नही जदो मैं ढके ठेडे खानदा सी

इक डंग दी बनी रोटी नाल तीने ढंग त्पौन्दा सी

अज तेरी किरपा है दाती भंडार तू मेरा भर दिता

खान पान नु माया दिति रेहन नु सोहना घर दिता

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

ओह दिन दाती किवे भुलावा अपने होए बेगाने सी

तेरे रस्ते चल पया सुने पेंदे ताने सी

आज तेरी किरपा है दाती सेवा लई अपना दर दिता

खान पान नु माया दिति रेहन नु सोहना घर दिता

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

फसे बूट ते पेंट नु टाकी जेब च थेला हुंदा न

उमर न्यानी नाल गूर दे जगदा मैं सोह्दा न

अज तेरी किरपा है दाती मेनू गाड़ियाँ वाला कर दिता

खान पान नु माया दिति रेहन नु सोहना घर दिता

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

मर जाना तेरा कमला होया कमलिया मारी जांदा है

तेरे सदके ना कमले दा तेरा शुकर मनोंदा है

आज तेरी किरपा है दाती तू ना कमले दा कर दिता

खान पान नु माया दिति रेहन नु सोहना घर दिता

एहने जोगा है नही सी मैं जिहने जोगा कर दिता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।