सब कुछ तेरे हथ मालका सब कुछ तेरे हथ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जो मापेया तो दूर हो ओहना पुत्रा नु मिला दे रब्बा

जो किस्मत विच जुज रहे ओहना नु मुकत करा दे रबा

मनया ने गलतियाँ होइयां ने मावा पुता लई रोइया ने अपनी वरकत देके रख

सब कुछ तेरे हथ मालका सब कुछ तेरे हथ

सब पेहला करदे मालका लोकी ता दर तेरे ते आवन

भूखे साधू ते घज पा दे लई लोकी लंगर लावन

मोह माया दी दुनिया नु देके रखी मत

सब कुछ तेरे हथ मालका सब कुछ तेरे हथ

कई गुरु सिख दिया लिबात कर्ण सब ठीक कर्ण लई,

कई चुप चाप बेठ गए सब कुछ हारण लई

लव दी एह अरदास शेहनशाह चरना दे विच रख

सब कुछ तेरे हथ मालका सब कुछ तेरे हथ

कोई कला नही दुनिया दे विच सब दे नाल संसार,

तुसी छड दो डोरा दाते ते भली करू करतार,

कोई पापा दा पार ना हो जावे सब दे अंदर तू ही वस्

सब कुछ तेरे हथ मालका सब कुछ तेरे हथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।