नाच रही माँ काली माँ नाच रही माँ काली माँ

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भीलख भीलख के रोये शंकर गूंजे आकाश पताली,

नाच रही माँ काली माँ नाच रही माँ काली माँ

भीलख भीलख के रोये शंकर गूंजे आकाश पताली,

दन दानव को मार गिराई सारी सेना चबा कर खाई

भूख प्यास मिटी न माँ की गरजी जीब निकाली

नाच रही माँ काली माँ नाच रही माँ काली माँ

नाच हुए जब सारे दानव संत और महंत खाए मानव

पशु प्राणी डरकर भागे आरे कौन करे रखवाली

नाच रही माँ काली माँ नाच रही माँ काली माँ

शिव शम्भु ने विनती सुनी जब बालक रूप में रोने लगे जब

देख के माँ की ममता जागी केलशी दूत विराली

नाच रही माँ काली माँ नाच रही माँ काली माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।