हरी द्वार की याद सतावे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरी द्वार की याद सतावे भोले कद सी बुलावे गा,

शिव शंकर केलाश पति कद नील कंठ पे आवे गा,

सावन बीता जान लाग रहया घना करे जी आने को

तद्फन लगाया बात मेरा तेरी गंगा जी में नहाने को

हरी की पैडी उपर भोले घोता कब लगवावेगा,

शिव शंकर केलाश पति कद नील कंठ पे आवे गा,

केलाशी महादेव सुनो तुम नील कंठ महाकाल मेरी

दीवाना हु चडी खुमारी दर्शन को फिलहाल तेरी

डूब रही मजधार बता कद नैया पार लगावे गा

शिव शंकर केलाश पति कद नील कंठ पे आवे गा,

टीकम नागर एकला खड़ा तेरे गलियारे में

बम बम की जैकार सुना दे कावडीयो के लारे में

कहे पूजा शर्मा टीर तने दिल से नाच मनावे गा

शिव शंकर केलाश पति कद नील कंठ पे आवे गा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।