हम भक्त है महाकाल के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कालो के भी काल के हम भक्त है महाकाल के,

भारत देश है हम को प्यारा रखेगे सम्बाल के

हम भक्त है महाकाल के

विष का प्याला पी कर के नील कंठ कहलाये भोले

रख लपेटे मुर्दों की श्मशानो के स्वामी भोले

रूप अनोखा भोले तेरा अधाम्भर को टाल के

हम भक्त है महाकाल के

रन चंडी माँ बनी थी काली बूंद बूंद लहू की पी डाली

शांत किया था माँ काली को वरना शिर्ष्टि होती काली

आँखों में भटके है ज्वाला जीबा को निकाल के

हम भक्त है महाकाल के

भुत प्रेत सब साथी तेरे सब साथी तेरे

कुण्डी सोटा बगल में तेरे

अविनाशी हो केलाशी हो पर्वत उपर डेरे तेरे

सावन में यु नगर बोले काँधे कावड डाल के

हम भक्त है महाकाल के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।