माँ शक्तिदादी आरती

- लक्ष्मण सिंह हरसोलाव
माता दुर्गा आरती रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शक्ति कोटासर धाम हैं, कलजुग के अवतार,

भलो कीजौ भक्त को, माँ विनती बारम्बार,

ॐ जय श्रीशक्ति दादी,माँ जय श्रीशक्ति दादी,

आप हो जग की माता,जगदम्बा आदि,

ओम् जय...

कोटासर में विराजत,महिमा अति भारी,

लाल चुंदड़ी सोहे,मूरत छबि प्यारी ,

ओम् जय...

जोशीकुल पर मैहर किन्ही,सब जग को तार्यो,

जो कोई शरणे आयो,सकल काज सार्यो ,

ओम् जय...

प्रगट भई कलजुग में,ब्राह्मण कुल मांई,

वंश उज्ज्वल कीन्हो,कोटासर आई ,

ओम् जय...

कुलदेवी चामुण्डा, संग भैरव सोहे

चण्ड मुण्ड विनाशिनी, दानव मति मोहे,

ओम् जय...

माना शक्तिदादी कि, जो महिमा नित वरणी ,

आरती आरत हरणी,सुख सम्पत्ति करणी,

ओम् जय...

दादी शक्ति की आरती,जो कोई नर गावे ,

रचना किन्ही श्रीराधे,दुःख दारिद जावे,

ओम् जय...

स्वर:- लक्ष्मण सिंह हरसोलाव

रचियता:- पण्डित श्रीराधे जी महाराज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।