जिथे जावा माँ ओथे गावा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जिथे जावा माँ ओथे गावा भेटा तेरियां

नाले संगता नु नाल गवावा मैं भेटा तेरियां

चोंकीया ते जागेया दे विच जाके गाउंदा हां

श्रधा दे नाल तेरी महिमा सुनादा हां

जिथे गावा बड़े नाल चावा मैं भेटा तेरियां

दुःख हॉवे सुख हॉवे सब तेनु दसा मैं ,

पेटा विच रोवा मैं भेटा विच हसा मैं

ताके दिल बाला हाल सुनावा मैं भेटा तेरियां

नाले संगता नु नाल गवावा मैं भेटा तेरियां

दिन रात सुबह शाम नाम तेरा लेनदा हां

दिल दियां गला तेनु भेटा विच कहंदा हां

आपी गा के मुरादा पावा मैं भेटा तेरियां

भेटा विच दिसदा प्रेम जिहदा सचा है

जग सारा जाने माँ ओ प्यारा तेरा बचा है

सोनू सागर तो लिख्वावा मैं भेटा तेरियां

नाले संगता नु नाल गवावा मैं भेटा तेरियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।