नाचे नाचे गे भोला जी तेरे दर पे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरिद्वार हम जायेगे फिर गंगा जी में नहायेगे

और फिर मिल कर भोले तेरी कावड को सजायेगे

दी जे भजाए गे बसे फुल कर के

नाचे नाचे गे भोला जी तेरे दर पे

चलदियाँ पैदल ही भोला अखोदी भर देगा भोले बाबा तू सब की झोली

न ही कोई टेंशन है ना ही कोई परेशानी नही है गबराना मन में है ठानी

हाथ शिव जी का रेहता है सिर पे

नाचे नाचे गे भोला जी तेरे दर पे

धुप हो बारिश हो नही गबराना है

बाबा के शिव लिंग पे गंगा जल चडाना है

आंधी आये या चाहे चमके बिजुलियाँ

रुकते नही है भोले बाबा के कवाडिया,

चडी खुमारी है मेहरा के सिर पे

नाचे नाचे गे भोला जी तेरे दर पे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।