रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

सुल्फा गांजा भांग धतुरा मेरे को ना भात से

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

देशी रोटी घर में भोले खइयो बड़े चाव से

भंगियाँ न मिलेगी भोले लस्सी मठा ठाठ से

मार पालकी बेठ के भोले जीमू बड़े ठाठ से

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

राह निहारु कब से भोले देखू तेरी बाट से

जिस दिन घर आवो गे भोले बन जावे की बात से

आगड़ पड़ोसी तब देखे गे रिश्ता तुझसे खास है

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

उड़ चटकनी से रोटी भोले लागे धनी प्यारी से

देखोगे अगर जाके भोले अब के बारी मेरी से

रणजीत की तुम सुन ले भोले वो तो पालनहार से

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।