बासी में धाम बड़ा प्यारा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन जैन भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज- सूरज कब दूर गगन से ...

है अजित नाथ प्रभु प्यारे , हम भक्तो के सहारे

धरती अम्बर में गूंजे , प्रभु जयकारे ये तुम्हारे बांसी में ,

धाम बडा प्यारा है बाबा का द्वारा है

प्राचीन प्रतिमा अजितनाथ की स्वर्णिम है इतिहास

बाड़ी काली से निकले प्रभु , छाया हर्षो था उल्लास

है वर्ष आठ सौ पुरानी , इस प्रतिमा की कहानी

बांसी में हुई प्रतिस्ठा ,ये दुनिया जिनक दीवानी बांसी में ,

धाम बडा प्यारा है ये बाबा का द्वारा है

प्रभु के प्रक्षालन जल से , जहाँ होती शांति धारा

अमृतमय है जल धारा का , रोगो को जिसने निवारा,

ये पावन शांतिधारा , मनभावन शांति धारा

शांति फैलाये जग में , अभिमंत्रित है ये धारा बांसी में धाम बडा प्यारा है,

ये बाबा का द्वारा है

वेदी प्रतिस्ठा में भक्त जब , कीड़े देख घबराये

जाप किया प्रभु अजित नाथ का , कीड़े नजर न आये

अदभुत है इनकी महिमा , ये अक्षत का है कहना

प्रभुवर के दर्शन करने , एकबार तो बासी आना बांसी में ,

धाम बडा प्यारा है ये बाबा का द्वारा है

।। सिंगर अक्षत ,प्रशुक जैन।।

।।रचनाकार।।

दिलीप सिंह सिसोदिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।