मशवीरा मेरा है ये इनकार मत करना

रूपेश चौधरी
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॥ पावन पाठ ॥

मशवीरा मेरा है ये इनकार मत करना

नाशवान दुनिया से ज्यादा प्यार मत करना

आँख खोल कर देखो वक़्त जा रहा है जो,

लौट के न आएगा इंतज़ार मत करना

वादा करके आया है आके सब भुलाया है,

जो खता कर दिया है तू बार-2 मत करना

तुझको तेरी करनी पे बद्दुआ क्यो कोई दे,

जान कर कभी ऐसा व्यवहार मत करना

तू भी याद उनको रख जो ख्याल तेरा रखता है,

इतने पवित्र रिश्ते को तार तार मत करना।

वो प्रकट वही होते भक्त की पुकार सुनकर,

आना परे खंभे में लाचार मत करना।

मन में तू बुराई का सोच भी नही लाना ,

सबका धन हमहि को हो ये विचार मत लाना

स्वर-रूपेश चौधरी

गीत-फणीभूषण चौधरी

संगीत-फणीभूषण चौधरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।