उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

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॥ पावन पाठ ॥

उलज मत दिल बहारो में बहारो का बरोसा क्या

साहारे टूट जाते है सहारो का भरोसा क्या

उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

तमानाये जो तेरी है वो बुहारे है वो सावन की

फुहारे सुख जाती है फुहारों का भरोसा क्या

उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

तू अपनी अक्ल मंदी पर विचारों पर न इतराना

है लेहरो की तरह चंचल विचारो का भरोसा क्या

उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

परम प्रभु की शरण लेकर विचारो से सजन रेहना,

कहा कब मन बिगड़ जाए विचारो का भरोसा क्या

उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

अगर विस्वाश करना है तो कर दुनिया के मालिक का

धनी कंजूस लोभी और मकारो का भरोसा क्या

उलज मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।