साईं जी तहानु तक तक के जीवा

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॥ पावन पाठ ॥

साईं जी तहानु तक तक के जीवा,

अंखिया राही दर्शन करके नित अमृत पीवा,

सुख विच शुकर मनावा ते मैं दुःख विच अर्ज सुनावा

हर वेले अरदास करा मैं पल पल शीश निभावा

सुमिरन विच बीते कुल जीवन बस एहो चाहवा

साईं जी तहानु तक तक के जीवा,

चन ते चकोर दे वरगा तुहाडा ते साडा ऐ नाता,

आसा हां कट पुतली ओ साईं जी तुसा हो लेख भी साडा,

आसा हा मुख ते अज्ञानी तुसी पूरण गयाथा,

साईं जी तहानु तक तक के जीवा,

दुनिया दे कम कारज अंदर याद न भुल्दी तुहाडी

दिल दे शीशे दे विच सूरत दिसदी तुहाडी

साहिल हर जी जान दे झलक दिखे तुहाडी

साईं जी तहानु तक तक के जीवा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।