भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

आयो रे आयो रे बिगड़े काम बनाने तेरे दर आयो रे

भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

सालासर बाबा की महिमा बड़ी निराली रे

दिन में है होली तो हर इक रात दिवाली रे

लाग्यो रे बाला जी का मेला पावन लागेयो रे

भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

भुत पिताश रोग और संकट निकट न झांके रे

अनजानी पुत्र महाब्ल शाली से दुःख काटे रे

पायो रे बाला जी के दर्शन से सुख पायो रे

भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

अष्ट सिद्ध ये मंगल कारी कष्ट निकन्द रे

दुखो की लंका आन जुलाए कहे जो वंदन रे

छायो रे बाला जी मन में म्हारे छायो रे

भायो रे भायो रे सालासर का धाम मेरे मन भायो रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।