झिक झोर करे बदरा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झिकझोर करे बदरा रातें के रात

ई बदरा है जन्म के बैरी

टिप टिप बरसे ई माने न बात,

बदरा राते के रात

झिकझोर करे बदरा रातें के रात

रैन अंधेरी बिजुरी चमके,

बिजुरी चमके ई जियरा डरात

बदरा रातें के रात

झिकझोर करे बदरा रातें के रात

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।