ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

जिधर देखती हु उधर तू ही तू है

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

मुझे जग के बंधन से तूने निकाला

मुझे हर कदम पर है तूने सम्बाला

मेरे संवारे तुही रुब रूह है

जिधर देखती हु उधर तू ही तू है

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

अगर आप कुछ मांगने को कहो गे

तुम्ही से तुही को फकत मांग लुंगी

मेरे संवारे तुही रुब रूह है

जिधर देखती हु उधर तू ही तू है

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

इस दिल में बसी है जो तस्वीर तेरी

तो मस्तक पे उभरी है तकदीर मेरी

मेरे संवारे तुही रुब रूह है

जिधर देखती हु उधर तू ही तू है

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

तेरे नाम धुन मैं तेरे गीत गाऊ,

तेरे मंदिरों में पोहंच मैं जब जाऊ

तो आवाज आये तू ही जुत्स जू है

मेरे संवारे तुही रुब रूह है

जिधर देखती हु उधर तू ही तू है

ख्यालो में तू है और खाव्बो में तू है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।