मैं बनकर मोर बाबा की

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं बनकर मोर बाबा की रोज मंदिर में आया करू,

नित भोर बई ओ सांवरियां मैं दर्शन तेरा पाया करू

मैं बनकर मोर बाबा की

जब मन्दिर मन्दिर आरती हो मैं शत शत उडती डोलु,

घंटी शम्भु की सुन के संग पेखो पेखो बोलू,

पंखो के अपने फैला के हो कर के मगन में नाचा करू

मैं बनकर मोर बाबा की

तेरी किरपा दृष्टि जो पढ़ जाए ये जीवन सवर जाए मेरा

हर सास में तेरा नाम बसे इक तू ही सहारा मेरा

जब भी भगतो के चर्चा हो मैं भगत तुम्हारे कहाया करू

मैं बनकर मोर बाबा की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।