क्यों कर रिहा से तू रोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

क्यों कर रिहा से तू रोले मैं तेरी दासी सु भोले

तेरे संग व्याह करवाना से श्री शम्भू नाथ जी तेरे चरणों में मने ध्यान लगाना से

मान जा मेरी गोरा प्यारी तू राजा की राज दुलारी मैं सिर पे लंगोटे आला सु

भांग रगड के पिया करू मैं कुण्डी सोटे वाला हु

मैं करू गुजारा पहाड़ा मैं बिन मेह्लो के रेह लुंगी

तेरी बना ले मने भोले मैं सब दुःख सुख सेह लुंगी

तने धन माया का बोरा चाहिए झुल्फा आला छोरा चाहिए

मैं लम्बे चोटे आला सु

भांग रगड के पिया करू मैं कुण्डी सोटे वाला हु

तीन लोक का दाता से तू दया मेरे भी कर ले

तेरे बिना न रहता हु तू मेरा दुःख कर ले रे

बड़े नाग गले में टूटे रे जागी मांगे राम भोज मर जागी

मैं जबर भरोते आला सु

भांग रगड के पिया करू मैं कुण्डी सोटे वाला हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।