गोरा रानी सावन का मेरे रंग चड गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी जान मरन में आ रही से कैसा लोग नशेडी गल पड़ गया

यु न बोले गोरा रानी सावन का मेरे रंग चड गया

लादे घोटा भर ला लोटा प्यास बुजा दे भोले की

पीवन की तेरी लिमत रही न बात यही से रोले की

थोड़े में तेरा काम न चले पार भोले तू लिमट कर गया

यु न बोले गोरा रानी सावन का मेरे रंग चड गया

राजी राजी प्यादे भंगियाँ या ते मून चडावे से

दुनिया आवे हरिद्वार में मने कभी न घुमावे से,

कितने वाधे हो लिए तेरे झूठ बोलन की हद कर लिया ,

यु न बोले गोरा रानी सावन का मेरे रंग चड गया

सिर मेरे जब भंग चढ़ जा गी आनद आवे धुमन में

रज के पी ले मेरे भंडारी नाच दिखाये सावन में

भगत सतेंधर तेरा पुजारी राज मेहर कैसे शंड गढ़ गया

यु न बोले गोरा रानी सावन का मेरे रंग चड गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।