गौरा भांग में घोटा लइये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रै गौरा भांग में घोटा लइये भोले का मौसम तू बनवइये

भोले मैं पीहर जारी हूं खूब नंदी से घुटवइये

ओ गौरा रानी क्या परेशानी म्हारे साथ में रहिये

छोड़ तनै मै पीहर जाऊं लौट कभी ना वापस आऊं

अकेला पहाड़ों में रहिये ..................

बिना बात के गौरा रानी क्यूं करती हो झगड़ा

बहुत घनी दुख पारी हूं मैं भांग में ला ला रगडा़

मेरे सै ब्याह कै संग में आई गौरा वापस मत जइये

छोड़ तनै मै पीहर जाऊं..........

बिना भांग कैसे जीऊं म्हारी दोनों की एक राशि

भांग तेरी बनगी रानी भोले मैं समझी तनै दासी

करो ना हांसी पिलाओ लासी पड़े ये सिल बट्टे ठइये

छोड़ तनै मै पीहर जाऊं............

ब्याह से पहले खुद कहवै थी खूब लगाऊं घोटा

मुझे नहीं मालूम था निकलेगा मेरा भाग यो खोटा

ना कर रहा तंग मैं मस्त मलंग अमित शर्मा सांची कहीं ये

छोड़ तनै मै पीहर जाऊं...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।