बैठो उड़न खटोले चलो मनसा धाम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बैठो उड़न खटोले चलो मनसा धाम याहा होती मुरादे पूरी

हरिद्वार में आने वाले सुन बिन दर्शन है यात्रा अधूरी

पेहले जाना हरी की पोडी मन में रख के माँ की भगती

जाके लगाना गंगा डुबकी फिर पावन तन मन करना

कोई पैदल मन्दिर जाए कोई झूले में बेठ के आये

जिसकी जैसे मन में शरद वैसे माँ के मंदिर जाए

माँ मनसा अपने भगतो से रखती कभी न दुरी

करते याहा पे जो विनती दुखड़े मनसा माँ सुनती

माँ की दया जिसे मिलती उसका जीवन सफल हो जाए

आती भगतो की टोली मेरी मनसा माँ भोली

भर देती सब की झोली

माँ का जैकारा सब लगाये

मैं भी हु शरण आज तेरी माँ बरसा दे किरपा थोड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।