प्रजापति भी कावड़ लाया छोरा कुम्हार का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम बम भोले करता आया देवो के देव का

प्रजापति भी कावड लाया छोरा कुमार का

काँधे कावड उठा के भोले धूम मचा वे भारी से

गंगा जल से भर के गारी भोले तुझे रिजावे से

डम डम डमरू बोले शिव काशी नाथ का

गरजा पति यो कावड लाया गोरा कुमार का

दकश प्रजापति के वंशक हम भोले तुझे मनावे है

दूध दही और घी से भोले मल मल तुझे नेह्लावे से

अंग भभूत रमामे भोला मुर्दे की राख का

प्रजापति भी कावड लाया छोरा कुमार का

दिल्ली यु पी हरयाने के भोले घने दीवाने से

प्रजापति का बचा भोले गुण तेरा ही गावे से

नागर भी मतवाला हुआ बस तेरे ही धाम का

प्रजापति भी कावड लाया छोरा कुमार का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।