आज म्हारे आँगनिये दशा माँ पधारिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज- मालिया माँ ना आशीर्वाद ...

हो...माँ..हो....मेरी माँ.. दशा माँ....

है..आज म्हारे आंगणिये दशा माँ पधारियां

दशा माँ पधारियां , म्हारा भाग्य है सँवारियां

है... मीनावाड़ा वाली , म्हारा कारज संवारिया

है..आज म्हारे आंगणिये दशा....

दशा माता दशा उनकी सुधारे

व्रत पूजन कर माँ को जो पुकारे

है..जिस घर मे आये मैया ,भरे सुखों से झोलिया

है..आज म्हारे आंगणिये दशा....

राजा नल को माँ ने पर्चा दिखाया

गलती पे अपनी वो बड़ा पछताया

है...नल दमयंती की , ये सच्ची कहानियां

है..आज म्हारे आंगणिये दशा....

दशा माता व्रत की महिमा महान है,

ग्रन्थ भी जिसका करते बखान है

है...पतिव्रता नारी व्रत , दस दिन का धारिया

है..आज म्हारे आंगणिये दशा....

दुखो का नाश कर सुख बरसाना

दिलबर की है माँ बस यही भावना

है... नागेश की मैया , तू ही करती रखवालीयां

है..आज म्हारे आंगणिये दशा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।