शिव जैसा कोई दिखे नहीं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं रहू गी तेरी ही बन कर,

इस दुनिया में तुझसे बड कर शिव शंकर कोई दिखे नही

ना देव असुर न किनर तेरे समाने कोई टिके नही

शिव शंकर जैसा दिखे नही

तुम तीन लोक के मालिक हो मैंने तुमको अपना मान लिया

मैंने करी तपस्या वन जा कर के बनो तुम ही मेरे पिया

मैं पति तुम ही को मान चुकी तुम सा जान चुकी के खूब लगाये चक्र

इस दुनिया में तुझसे बड कर शिव शंकर कोई दिखे नही

तेरे शीश से गंगा बेहती है चंदा मस्तक पे विराज रहां

तिरशूल हाथ गल विष धर है डम डम डमरू बाज रहा

तुम जग से नाथ निराले हो पी जाते विष के प्याले

नही तेरी किसी से टकर मैंने खूब लगाये चक्र

इस दुनिया में तुझसे बड कर शिव शंकर कोई दिखे नही

राजा की तू राज दुलारी है हम तो साधू सन्यासी है

ना होगी संग गुजर गोरी हम मरघट जंगल वासी है

इस जोगी संग क्या पाओगी जीवन भर धक्के खाऊ गी

मैं खुद ही सोच समज कर आई हु आप तक चल कर

शिव शंकर कोई दिखे नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।