मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

कब बदलेगा तू मेरे साईं फ़कीर

मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

दुनिया का क्या है दुनिया मतलब की है ये दुनिया

है नाम के ये रिश्ते सचा रिश्ता है तू

मेरे साईं फ़कीर

मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

जिस राह पे चला था धोखा है क्या पता था

ठोकर लगी तो जाना सचा रहबर है तू

मेरे साईं फ़कीर

मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

पापो की गठरी मैं था सिर पे उठाये फिरता

अनजान था मैं रब से साईं और क्या मैं करता

तेरा द्वार मिला सचा प्यार मिला

मेरे साईं फ़कीर

मेरे हाथो की लकीर मेरे माथे की लकीर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।