मैं कृष्ण बजू या राम रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं कृष्ण बजू या राम रे

मेरे दोनों में अटके प्राण रे,

तेरी पूजा तेरी भगती और न दूजो काम रे

मैं कृष्ण बजू या राम रे

दर्श बिना मोरी अखियाँ तरसे

राह तके सुबह शाम रे

मैं कृष्ण बजू या राम रे

केहत कबीर सुनो बई साधू

कंचन नित सख खाम रे

मैं कृष्ण बजू या राम रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।