गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ लक्ष्मी अब मुझको ये वरदान दीजिये,

गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

आँखे है भीगी भीगी पाँव थाके हमारे

तुलसी कुम्ला गई है आज घर के द्वारे

व्याकुल हिर्द्येको फिर मुस्कान दीजिये

गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

निशा अमावस की आई ले दीपो का त्यौहार

साजन के घर आने से सजनी करे शंगार

बाहों में जग जुले वो अरमान दीजिये

गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

हिन्दू हम को प्यारा है मुस्लिम है भाई हमारा

आओ मिल कर गाये हम जय हिन्द का नारा

भारत के इस लोक त्रन्त्र को मान दीजिये

गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

अखंडता और एकता का हम सब पाठ पड़े

सारे धर्म बराबर है इस अर्दाश पर चले

सलमा भारत माता का यश गान कीजिये

गम दूर कर प्रकाश से धन धान कीजिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।