पैसा किस का साथी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पैसा पैसा कैसा पैसा पैसा किस का साथी है

आती है जिस शान से दोलत उसी शान से जाती है

पैसा पैसा कैसा पैसा पैसा किस का साथी है

देर नही लगती खाली होते भरे खजानों को भीख मांगते देखा हमने बड़े बड़े धनवानों को

बंधी ग्रेह में रही उम्र भर मैया श्याम सलोने की

राम हुए वनवासी जल गई लंका सोने की

हरीश चन्दर जैसे राजा को मरघट तक पहुचाती है

आती है जिस शान से दोलत उसी शान से जाती है

दोलत इक सुनेहरी नागनी जेहर बड़ी सोगात है

चार दिनों की ये है चांदनी फिर तो अँधेरी रात है

ना करना तू इस पे भरोसा ये चंचल दीवानी है ,

आज याहा कल वाहा है दोलत ये तो आणि जानी है

पाप कराती इंसानों से ये बईमान बनाती है

आती है जिस शान से दोलत उसी शान से जाती है

प्रभु ने दिया संसार का भेभाव कर्ज समज उपभोग करो

नर तन केवल इसी लिए है प्रभु से अपना योग करो

हाड जले जो सुखी लकड़ी केश यु गास रे

कंचन सी तेरी काया जल गई आया न कोई साथ रे

अपने और पराये रोमी श्मशान के साथी है

आती है जिस शान से दोलत उसी शान से जाती है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।