तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

लबो से आह जो निकले दिखाई क्यों नही देती

बरसती है मेरी आँखे जो सावन में धता बरसे

इन अश्को में तुझे चाहत दिखाई क्यों नही देती

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

तेरी विरहा में रोज मैं ना जीती हु न मरती हु

मगर तुझको मेरी हालात दिखाई क्यों नही देती

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

मेरे दिल की हर इक धडकन तेरा ही नाम लेती है

तुझे आवाज धडकन की सुनाई क्यों नही देती

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

कही एसा न हो दर्शन बिना ही आँख मुंड जाए

तुझे इस दास की हसरत दिखाई क्यों नही देती

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।