तुमको जाना है जहा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुमको जाना है जहा तक तुमको माना है वाहा तक

इस जमीन से आसमा तक देह से परमात्मा तक

तू ही तू है तू ही तू है दूसरा कोई नही

तुमको जाना है जहा तक तुमको माना है वाहा तक

दर्शनों की आस लेके चल पडा हु ओह वेफिकर

कब कहा पर तुम मिलोगे ये नही मुझको है खबर

जिन्दगी के रस्ते में देखता हु जिस तरफ भी,

तू ही तू है,दूसरा कोई नही

तुमको जाना है जहा तक तुमको माना है वाहा तक

मैं नदी की हर लेहर को देख ता तो हु इक टक,

किस लेहर में मिल सकेगी तेरी चितवन की इक झलक

मन की मेहकी वादियों में देखता हु जिस तरफ भी

तू ही तू है,दूसरा कोई नही

तुमको जाना है जहा तक तुमको माना है वाहा तक

चाँद तारो में तुम्हारी रश्मियों की है इक झलक

फिर भी छूना चाहती है आप को दिल की एक ललक

इस नशीली रात में भी देखता हु जिस तरफ भी

तू ही तू है,दूसरा कोई नही

तुमको जाना है जहा तक तुमको माना है वाहा तक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।