झुला झूले सातो बेह्नियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

ऐसे चमके सातो बहनिया जैसे जुगनू रात माँ

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

पेहले झूले माँ काली भवानी ज्वाला झुला झुलावे

दोनों बेहनियाँ करे ठिठोली मंद मंद मुसकावे रे

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

आई बारी जब शारद की विंद वासनी झुलावे

आल हां माँ की करे आरती मन ही मन हर्शावे रे

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

वैष्णो माँ झुला झूले जब नैना देवी झुलावे

पवन चले माँ उड़े चुनरियाँ बजरंगी हरशावे रे

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

दुर्गा मैया झुला झूले भेरो डोर सम्बाले

अरे ऐसे झूले सातो बहनिया सावन मास कहावे रे

झुला झूले सातो बेह्नियाँ रिम झिम सी बरसात माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।