लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे

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॥ पावन पाठ ॥

ख़ुशी दो जहां की मिलेगी यही से,

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

ये रेहमत न जग में मिलेगी कही से

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

वो मुस्कान मीठी वो प्यारी सी थपकी

मिली जिसको जागी है तकदीर उसकी

रिजा लो रिजा लो इन्हें बंदगी से

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

अगर ये दयालु नजर डाल देगा

तो सिर से बलाए ये सभी टाल देगा

मिटेगे अँधेरे सभी जिन्दगी के

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

श्रधा की बाती दिलो में जला कर,

भगती के रंग में चुनरियाँ रंगा कर ,

गुरु दर पे रेहना सदा सादगी से

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

मेहरबान है ये दया वान है ये अंग संग प्रभु की पहचान है ये

साईं श्याम हम को मिला सुख तुम्ही से

लिए जाओ भगतो साईं की आशीषे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।