अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई काम दुनिया में शुरू ही न होता

अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता

गीता रामायण में समजा दिया है सभी धर्मो का इस में लिखा है

गुरु बरह्मा विष्णु गुरु शिव होता

अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता

प्रबु राम ने गूर की महिमा को जाना

तभी विश्वव् मित्र और वशित जी को माना

माने जो गुरु को उसे दुःख न होता

अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता

सीता को गुरु मिले सती अनुसइयां,

दियां ज्ञान भगती का कुटियाँ में मैया

पति की करो सेवा तो बड़ा सुख होता

अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।