म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

लॉकडाउन हटा भोले कावड को तरस ते है

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

हरी द्वार की नगरी में भोले मेले लगते है

हरी की पोड़ी गूंजे जय कारे लगते है,

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

नंदी की सवारी है केलाश के वासी हो

हर हर बम बम भोले डमरू भी भजते है,

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

नर नारी सब भोले कावड तेरी लाते है

जल भर कर के भोले किरपा तेरी पाते है

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

चाहे पड़ जावे छाले पग फिर भी ना रुकते है

दया दृष्टि से तेरी भोले मंजिल को पाते है

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

काँधे धर कर भोले कावड़िया जो चलते है

छम छम बाजे धुंगरु नागर शंख भी बजते है

म्हारा मन तरसे भोले मिलने को तरस ते है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।