तिरलोकी रो नाथ जाट घर रह गयो हाळी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सौ बीघा को खेत जाट रो

राम भरोसे खेती रे

आधा में बाया गेहूँ चणा नै

आधा में दाणा मैथी रे

बिना बाड़ रो खेत जाट रो

श्याम रूखाळी रे

तिरलोकी रो नाथ जाट घर रह गयो हाळी रे

जाट जाटणी निर्भय सुता

सुता छोरा छोरी रे

साँवरियो पोहरा रे ऊपर

कौन करेला चोरी रे

चोर आवे पर चक्कर लगावे

जावे खली रे

तिरलोकी रो नाथ जाट घर रह गयो हाळी रे

मोठ बाजरी रो राम सोगरो

ऊपर घी रो लचको रे

पालक री तरकारी रान्धू

भरे मूली रे बटको रे

छाछ राबड़ी रा करे कलेवो

भर भर थाली रे

तिरलोकी रो नाथ जाट घर रह गयो हाळी रे

रह गयो हाळी रह गयो हाळी रह गयो हाळी रे

तिरलोकी रो नाथ जाट घर रह गयो हाळी रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।