अजमलजी न दर्शन दीन्हा कृष्ण मिल्या समुन्द्र माही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अजमलजी न दर्शन दीन्हा, कृष्ण मिल्या समुन्द्र माही

मांग मांग रे भगत हमारा, अब कर दया तेरी मन चाही

हाथ जोड़ अजमलजी बोल्या, अरज सुणो यदुराई

वचन देवो पृथ्वी का मालिक, बिना वचन मांगू नाहीं

ब्रह्मा वाचा शंकर वाचा, चांद सूरज वचना माई

जे तेरा कारज ना सारा तो, फेर मान ल्यो झूठा ही

हाथ जोड़ अजमलजी बोल्या, सुण ठाकुर मेरा साईं

आप सरिसा पुत्र हमारे, घर आओ रमणा तांई

मेरे सरिसा पुत्र बावला दुनियां म जलमे नाहीं

तीन लोक का नाथ कहिजूं, या के बात कही भाई

के तो ठाकुर वचन हार गया, प्राण तजूं समदर मांही

के भगतां के घरां पधारो, अजमलजी आ फ़रमाई

करया वचन म्हे कदे न हारा, भगवत घर रीति या ही

दसवें महीने तवरयां म आवां, इसमें फर्क रत्ति नाहीं

बालक होय पालणे आया ,पूरा वचन करणै तांई

धरती अम्बर रहसी तजरत , बाजाला अजमल का ही

आप निरंजन तपे रुणिचे, परचा दे कलयुग माही

"चन्द्रो बारठ" बिड़द बखाने, लालदास गुरु दरसाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।