जद म्हारा सतगुरु रीझे रै मायला

संत कबीर
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जद म्हारा सतगुरु रीझे रै मायला, जद म्हारा सतगुरु रीझे

जद म्हारा सतगुरु रीझे रै मायला, जद म्हारा सतगुरु रीझे

तन कर बकरा, मन कर सिकरा, ज्ञान खडग कर लीजे

जहरीली खाल नै गैर परै री, नानो चूनर भीजे मायला

जद म्हारा सतगुरु रीझे...

निर्गुण चुला सुगण देवी, ज्ञान फूंक दे दीजे

कुबद काचरी लालच धनियो, ममता री मिरच बटीजे मायला

जद म्हारा सतगुरु रीझे...

छाण छुण चूल्हे पर टेयी, खदबद खदबद सीजे

जद म्हारो मायलो उफणबानै लाग्यो , जतना री ढकणी दीजे मायला

जद म्हारा सतगुरु रीझे...

चनणा री चौकी जुगत बैठ बो, प्रेम थाल पुरसिजे

कहत कबीर सुणो भाई साधो, भर भर प्याला पीजे मायला

जद म्हारा सतगुरु रीझे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।