एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे, शरणा पड्या रहूँगा

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे, शरणा पड्या रहूँगा

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे, शरणा पड्या रहूँगा

पत्थर न पुजूं, पत्ता न पुजूं, ना कोई देव मनाउंगा

ठाठबाठ मैं बस थारी मूरत, उसी के आगे झूक जाउंगा|

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे

गंगा न जाऊँ, जमुना न जाऊँ, ना कोई तीर्थ नाहऊंगा

अड्सठ तीरथ, घट ही मैं गंगा, उसीसे मलमल नाऊंगा

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे

औषद् ना पिऊं, बूटी ना पिऊं, ना कोई दर्द बताऊंगा

जद रीझे म्हारा सत्तगुरू सायब, उसीको नबज दिखाऊंगा

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे

सब रस छोड, एक रस चाखु, सत्त अमरापुर जाउंगा

शरण मछन्दर जति गोरख बोल्या, ब्रम्ह ज्योत मिल जाऊंगा

एक डोर लग जाऊंगा गुराजी थारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।