राणोजी करमाँ रो संगाती राणा कोई भी नहीं

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी लगी राम से प्रीत

म्हारी लगी हरी से प्रीत

राणोजी करमाँ रो संगाती राणा कोई भी नहीं

एक माता के दोय लाडला जी, ज्यारा न्यारा न्यारा भाग

राणोजी करम रो संगाती ...

एक के सिर पर छत्र फिरे, दूजो बिक्शा मांगर काहय

राणोजी करम रो संगाती ...

एक गऊ का दोय बाछड़ा जी, ज्यारा न्यारा न्यारा भाग

राणोजी करम रो संगाती ...

एक तो शिवजी को नाँदियो बने, दूजो बिणजारै को बैल

राणोजी करम रो संगाती ...

एक माँटी का दोय बाटला जी, ज्यारा न्यारा न्यारा भाग

राणोजी करम रो संगाती ...

एक तो शिवजी कै जल धारा चढ़ै, दूजो शमशाणा मँ जाय

राणोजी करम रो संगाती ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।