लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे रे

शिरो धराउँ, श्रीखंड धरु नै सुतरफेनि सही

ऊपर ताजा घी धरु पण, माखन जेवा नहीं

लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे रे

ज़ात ज़ात ना मेवा धराउँ नै, दूध शाकर नै दही

भांत भांत ना मेवा धराउँ नै, दूध शाकर नै दही

छपन भोग सामग्री धरु पर, माखन जेवा नहीं

लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे रे

एक गोपीये जम वानु किधु नै, थाल परसी अभी रही,

भांत भांत नी भाजी धरु पर, माखन जेवा नहीं

लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे

एक गोपीये माखन धर्यो नै, हाथ जोड़ी अभी रही

दीना नाथ रिझ्या त्यारे, नाच्या थई थई थई

लाला नै माखन भावे रे लाला नै मिश्री भावे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।