कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा

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॥ पावन पाठ ॥

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

कोई तरह सब के दुःख में अनसु न बहायेगा साईं

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

फिकर तुझे है दुनिया की तू कितना नेक फ़रिश्ता है

हिन्दू का हम दर्द भी है तू मुस्लिम से भी रिश्ता है

जैसे तू निभाता है सब से कोई न निभाएगा साईं

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

जान गए हम सुबहो शाम क्यों दर दर अलख जागए तू

कौन भक्त किस हाल में है ये देखने दर दर जाए तू

ओरो के दुखो का भोज कोई तुझ बिन न उठाये गा साईं

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

बाबा तू अपने बन्दों के हक में सदा इन्साफ करे

जो पापी माफ़ी न मांगे उसकी भूल भी माफ़ करे

कोई और गुनेगारो पे न यु रहमत बरसायेगा साईं

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

कोई पीर फ़कीर तेरे जैसा तेरे बाद न आएगा साईं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।