सुखा दी सवेर कर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुखा दी सवेर कर हुन नहियो देर कर सबना दी मेहर कर झंडेवाली माँ

इतनी अर्जी साडी दाती मंजूर कर हूँ नहियो देर कर झ्न्देवाली माँ

सुखा दी सवेर कर

किथे न वैर हो हर पासे खैर हो कोई भी न गैर हो शेरावाली माँ

बिछड़ा दा मेल कर एहो जेहा खेल कर सबना ते मेहर कर शेरावाली माँ

सुखा दी सवेर कर

सच दिया रावा हॉवे प्रेम दियां छावा हॉवे हक दी कमाई हो तेरी वडीयाई हो

तेरा शुकराना हॉवे एहो जेहा खेल कर

सुखा दी सवेर कर

इतनी अर्ज साडी दाती पूरी करदे सुखा नाल वेहड़े मैया सब न दे भर दे

इतनी अर्जी साडी मंजूर कर राज दी एह गल दाती हूँ मंजूर कर

सबना ते मेहर कर चिन्तपुरनी माँ

सुखा दी सवेर कर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।